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एक प्रति भाशाली अदाकार की मृत्युके उपरांत बॉलीवुड मेंमानो अफवाहों का भूचाल ही आ गया है। अफवाहेंकेवल
अफवाह ना रहकर सत्यता की कसौटी पर सच साबि त हो रही हैं। इस रुपहलेपरदेके पीछेका अंधेरा सबको
आश्चर्यचकि त कर रहा है। लोग खुद को ठगा सा महसूस कर रहेहैं। इस चकाचौंध के पीछेके वीरानेसेआम
जनमानस दुखी है।
बॉलीवुड आजकल दो धड़ों मेंबंट चुका है। एक धड़ा तो यह माननेको कतई भी तैयार नहीं हैकि कि सी भी तरह का
कोई अवगुण इस उद्योग मेंहै। जबकि दूसरा धड़ा उच्च सुर सेइस उद्योग के कई अवगुणों का बखान कर रहा है।
यौवनवस्था मेंपहुंचतेही लगभग हर नौजवान बॉलीवुड के कि सी अदाकार मेंअपना अक्स तलाशनेलगता है।
उसके रंग - रूप , पोशाक और चाल - ढाल का अनुसरण करनेलगता है। कि सी भी फि ल्म मेंअदाकार द्वारा नि भाए
पात्र के साथ खुद को बंधा हुआ महसूस करनेलगता है। लोग यह मानकर चलतेहैंकि उस अदाकार नेजि स पात्र
को मूर्त रूप दि या है, वह अदाकार खुद वैसा ही हैऔर उसी पात्र को स्वयंमेंभी उतारना चाहतेहैं। एक तरह सेवह
अदाकार उनका आदर्श बन जाता हैलेकि न आज की स्थि ति तो कुछ भि न्न ही बन चुकी है। परदेपर आदर्श चरि त्र
जीनेवालेअदाकारों के अपनेजीवन मेंकि तनी कालि ख है, यह बात सबको दुखी कर रही है। मन यह माननेमें
संकोच कर रहा हैकि परदेपर वीर और साहसी ऐति हासि क पात्रों को जीनेवालेअदाकार अपनेजीवन मेंइतने
कायर हैं। परदेपर सच्चाई पर चलनेका संदेश देनेवालेअदाकारों का अपना जीवन इतना कलुषि त है।
अंत मेंजन मानस की न्यायपालि का सेयही गुहार हैकि न्याय सबके लि ए एक समान होना चाहि ए। अपराध करने
वाला चाहेजि स स्तर का भी हो, वह छूटना नहीं चाहि ए। कानून अंधा होता हैतभी यह उक्ति चरि तार्थ होगी।
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